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बेन्यामिन नेतन्याहू ने साफ़ शब्दों में कहा है कि वे ईरानी नेतृत्व को इसराइल में आतंकवादी नाक घुसाने की इजाज़त नहीं देंगे.

उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रिफ़ पर आरोप लगाया कि वे ईरान के नेतृत्व के वाकपटु प्रवक्ता हैं जो झूठ बोलते हैं. ज़रिफ़ इस बैठक में ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अभी बैठक में उनका संबोधन बाक़ी है.

नेतान्याहू ने कहा कि पिछले सप्ताह ईरान ने इसराइल की सीमा में ड्रोन भेजे थे, जिसे हमारे सुरक्षा बलों ने मार गिराया था, लेकिन ईरान इससे इनकार करता रहा है.

उन्होंने नष्ट किए ड्रोन के अवशेष को हाथ से उठाकर ज़रिफ़ को सीधे संबोधित करते हुए कहा, "क्या आपने इस ड्रोन का पहचाना? आपको पहचानना चाहिए, क्योंकि ये आपका ही है. हमारी परीक्षा मत लीजिए."

लंदन, प्रेट्र। पहले लोग किसी जानकारी के लिए डिक्शनरी या किताबों की मदद लेते थे। लेकिन सर्च इंजन गूगल के आने के बाद पूरी तरह उस पर ही आश्रित हो गए हैं।

देश-विदेश, फिल्म, साहित्य या विज्ञान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए दिमाग पर जोर डालने के बजाय लोग अब गूगल की शरण लेते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि गूगल का ज्यादा इस्तेमाल हमारी स्मरण शक्ति को कमजोर कर डिमेंशिया का मरीज बना सकता है।

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फ्रैंक गन मूर कहते हैं, 'मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। लेकिन गूगल का प्रयोग कर हम अपने शरीर पर ही प्रयोग कर रहे हैं।' बढ़ती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

याददाश्त कमजोर होने के पीछे आसपास का वातावरण, चिंता या अन्य आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इन कारणों की सूची में जल्द ही गूगल भी जुड़ सकता है। वर्ष 2015 में दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 4.5 करोड़ थी।

लंदन, प्रेट्र। पहले लोग किसी जानकारी के लिए डिक्शनरी या किताबों की मदद लेते थे। लेकिन सर्च इंजन गूगल के आने के बाद पूरी तरह उस पर ही आश्रित हो गए हैं।

देश-विदेश, फिल्म, साहित्य या विज्ञान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए दिमाग पर जोर डालने के बजाय लोग अब गूगल की शरण लेते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि गूगल का ज्यादा इस्तेमाल हमारी स्मरण शक्ति को कमजोर कर डिमेंशिया का मरीज बना सकता है।

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फ्रैंक गन मूर कहते हैं, 'मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। लेकिन गूगल का प्रयोग कर हम अपने शरीर पर ही प्रयोग कर रहे हैं।' बढ़ती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

याददाश्त कमजोर होने के पीछे आसपास का वातावरण, चिंता या अन्य आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इन कारणों की सूची में जल्द ही गूगल भी जुड़ सकता है। वर्ष 2015 में दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 4.5 करोड़ थी।

लंदन, प्रेट्र। पहले लोग किसी जानकारी के लिए डिक्शनरी या किताबों की मदद लेते थे। लेकिन सर्च इंजन गूगल के आने के बाद पूरी तरह उस पर ही आश्रित हो गए हैं।

देश-विदेश, फिल्म, साहित्य या विज्ञान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए दिमाग पर जोर डालने के बजाय लोग अब गूगल की शरण लेते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि गूगल का ज्यादा इस्तेमाल हमारी स्मरण शक्ति को कमजोर कर डिमेंशिया का मरीज बना सकता है।

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फ्रैंक गन मूर कहते हैं, 'मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। लेकिन गूगल का प्रयोग कर हम अपने शरीर पर ही प्रयोग कर रहे हैं।' बढ़ती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

याददाश्त कमजोर होने के पीछे आसपास का वातावरण, चिंता या अन्य आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इन कारणों की सूची में जल्द ही गूगल भी जुड़ सकता है। वर्ष 2015 में दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 4.5 करोड़ थी।