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]नए नवेले कांग्रेस अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्नाटक में अपनी सत्ता बचाने की है. अगर कांग्रेस कर्नाटक को बचाने में कामयाब होती है, तो राहुल गांधी को इसका फ़ायदा साल के अंत में होने वाले बीजेपी सत्तारूढ़ राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तो मिलेगा, साथ ही वो अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्षी नेता के तौर पर मोदी को टक्कर दे सकते हैं. और इसका सीधा फ़ायदा 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कर्नाटक में मिल सकता है जहां लोकसभा की 28 सीटें हैं.

लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. इस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफ़ी मायने रखता है और यही वजह है कि इस बार कर्नाटक में विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले 2018-19 के लोकलुभावन बजट में कांग्रेस की रणनीति भी साफ़ दिखी.

इस बजट के ज़रिए उन्होंने केन्द्र सरकार के लोक-लुभावन नीतियों का मुकाबला किया और भविष्य में राज्य और केन्द्रीय स्तर पर कांग्रेस की नीतियों की तरफ़ भी इशारा किया.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बीमा कवरेज और निःशुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन के साथ-साथ बिना सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं.

कर्नाटक राज्य सरकार ने किसानों के लिए बजट में खास प्रावधान रखे. इससे राज्य में क़रीब 70 लाख किसानों को फ़ायदा होगा. लेकिन कांग्रेस की नज़रें सिर्फ़ कर्नाटक में बसे किसानों पर ही नहीं है बल्कि इसके ज़रिए तीन बड़े राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ में आने वाले चुनाव पर भी हैं, जहां किसानों की नाराज़गी खुल कर सामने आई है.

लंदन, प्रेट्र। पहले लोग किसी जानकारी के लिए डिक्शनरी या किताबों की मदद लेते थे। लेकिन सर्च इंजन गूगल के आने के बाद पूरी तरह उस पर ही आश्रित हो गए हैं।

देश-विदेश, फिल्म, साहित्य या विज्ञान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए दिमाग पर जोर डालने के बजाय लोग अब गूगल की शरण लेते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि गूगल का ज्यादा इस्तेमाल हमारी स्मरण शक्ति को कमजोर कर डिमेंशिया का मरीज बना सकता है।

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फ्रैंक गन मूर कहते हैं, 'मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। लेकिन गूगल का प्रयोग कर हम अपने शरीर पर ही प्रयोग कर रहे हैं।' बढ़ती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

याददाश्त कमजोर होने के पीछे आसपास का वातावरण, चिंता या अन्य आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इन कारणों की सूची में जल्द ही गूगल भी जुड़ सकता है। वर्ष 2015 में दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 4.5 करोड़ थी।

लंदन, प्रेट्र। पहले लोग किसी जानकारी के लिए डिक्शनरी या किताबों की मदद लेते थे। लेकिन सर्च इंजन गूगल के आने के बाद पूरी तरह उस पर ही आश्रित हो गए हैं।

देश-विदेश, फिल्म, साहित्य या विज्ञान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए दिमाग पर जोर डालने के बजाय लोग अब गूगल की शरण लेते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि गूगल का ज्यादा इस्तेमाल हमारी स्मरण शक्ति को कमजोर कर डिमेंशिया का मरीज बना सकता है।

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फ्रैंक गन मूर कहते हैं, 'मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। लेकिन गूगल का प्रयोग कर हम अपने शरीर पर ही प्रयोग कर रहे हैं।' बढ़ती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

याददाश्त कमजोर होने के पीछे आसपास का वातावरण, चिंता या अन्य आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इन कारणों की सूची में जल्द ही गूगल भी जुड़ सकता है। वर्ष 2015 में दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 4.5 करोड़ थी।

लंदन, प्रेट्र। पहले लोग किसी जानकारी के लिए डिक्शनरी या किताबों की मदद लेते थे। लेकिन सर्च इंजन गूगल के आने के बाद पूरी तरह उस पर ही आश्रित हो गए हैं।

देश-विदेश, फिल्म, साहित्य या विज्ञान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए दिमाग पर जोर डालने के बजाय लोग अब गूगल की शरण लेते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि गूगल का ज्यादा इस्तेमाल हमारी स्मरण शक्ति को कमजोर कर डिमेंशिया का मरीज बना सकता है।

ब्रिटेन की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के फ्रैंक गन मूर कहते हैं, 'मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। लेकिन गूगल का प्रयोग कर हम अपने शरीर पर ही प्रयोग कर रहे हैं।' बढ़ती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है।

याददाश्त कमजोर होने के पीछे आसपास का वातावरण, चिंता या अन्य आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इन कारणों की सूची में जल्द ही गूगल भी जुड़ सकता है। वर्ष 2015 में दुनियाभर में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 4.5 करोड़ थी।